छत्तीसगढ़

विश्व पर्यावरण दिवस पर सार्थक चर्चा’जीवन शैली पर आत्मचिंतन और बदलाव जरूरी

भिलाई/द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा द्वारा इंस्टीट्यूशन ऑफ प्लांट इंजीनियर्स (आई आई पी ई) छत्तीसगढ़ चैप्टर के सहयोग से विश्व पर्यावरण दिवस 2025 के अवसर पर गुरूवार 05 जून , 2025 को संध्या एक समारोह का आयोजन किया गया | इस आयोजन के मुख्य अतिथि श्री बिपिन कुमार गिरी , कार्यपालक निदेशक सेल/ भिलाई इस्पात संयंत्र थे | विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता के रूप में, डॉ आलोक साहू , प्रधान निदेशक, सिपेट, भारत सरकार, रायपुर एवं डॉ प्रबीर कुमार नायक , क्षेत्रीय निदेशक, उत्तर मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र , केन्द्रीय भूजल बोर्ड, भारत सरकार, रायपुर मौजूद थे |
कार्यक्रम के प्रारम्भ में अपने स्वागत भाषण में द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के भिलाई स्थानीय केंद्र के मानसेवी सचिव श्री बसंत साहू ने अतिथियों का स्वागत करते हुए 2025 के लिए निर्धारित विषय “बीट प्लास्टिक पाल्यूशन ” के बारे में जानकारी दी | श्री साहू ने कहा कि प्लास्टिक प्रदुषण एक वैश्विक समस्या है तथा प्रतिवर्ष भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में रिसता है, जिससे झीलें, नदियाँ और समुद्र प्रदूषित होते हैं| उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस 2025 का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए स्थायी समाधान प्रदान करना और इस विषम समस्या के बारे में जागरूकता लाना है |
मुख्य अतिथि  बिपिन कुमार गिरी , कार्यपालक निदेशक (खदान), सेल/भिलाई इस्पात संयंत्र ने अपने उदबोधन में कहा कि स्वस्थ जीवन शैली पर्यावरण संरक्षण में सबसे बड़ा योगदान दे सकती है | उन्होंने कहा कि हमें अपने पूर्वजों से प्रकृति का संरक्षण करना सीखना चाहिए | श्री गिरी ने कहा कि बचपन के दिनों में हमारी माता हमें ताजा और गरम भोजन खिलाती थी | नयी पीढ़ी की पैकेज्ड भोजन की पसंद की वजह से प्लास्टिक कचरे में बहुत अधिक इजाफा हुआ है | श्री गिरी ने कहा कि हमें भारतीय जीवन दर्शन को अपनाना होगा जिसमे हमेशा अपनी जरूरतों को न्यूनतम रखने के बारे में कहा गया है | उन्होंने कहा कि प्लास्टिक ने मानवता के विकास के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया परन्तु आज प्लास्टिक प्रदुषण की समस्या अव्यवस्थित निपटान से हो रही है | श्री गिरी ने कहा कि सरकार और सभी संस्थाएं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास कर रही है पर आम जनमानस की मानसिकता में बदलाव आने से ही हम प्रकृति और पर्यावरण की सही मायने में रक्षा कर पायेंगे |
विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता डा आलोक साहू , प्रधान निदेशक, सिपेट, भारत सरकार, रायपुर ने अपने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्लास्टिक के बहुउपयोगी फायदे के बारे में जानकारी दी | उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में हम प्लास्टिक के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते चाहे वह मोबाइल फ़ोन हो , कंप्यूटर हो , हवाई जहाज हो, पानी का पाइप हो हर जगह प्लास्टिक मौजूद है | डॉ. साहू ने कहा कि प्लास्टिक की उत्पत्ति ने हमारे प्रकृतिक संसाधनों की रक्षा में भी बहुत बड़ा योगदान दिया है I डॉ. साहू ने बतलाया कि कोविड काल में प्लास्टिक ने सभी के, विशेषकर चिकित्सा-कर्मियों के जीवन रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का प्रदुषण हमारे लिए समस्या है और जिसके लिए आम-जनमानस की सोच बहुत हद तक जिम्मेदार है I डॉ. आलोक साहू ने कहा कि भारत में सिर्फ 60% प्लास्टिक वेस्ट की रीसाइक्लिंग हो पा रही है I उन्होने प्लास्टिक के विभिन्न प्रकार और उसके कचरे की छटाई और पुनरुपयोग /निपटान और उनसे जुड़े नियम के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी I
विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता डॉ प्रबीर कुमार नायक , क्षेत्रीय निदेशक, उत्तर मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र , केन्द्रीय भूजल बोर्ड, भारत सरकार, रायपुर, ने अपने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से देश, विशेषकर छत्तीसगढ़ में भू-जल की वर्तमान स्थिति और उससे जुडी चुनौतियों के बारे में बतलाया | डॉ. नायक ने पानी के चक्र को समझाते हुए बतलाया की किस प्रकार भूजल की रिचार्जिंग होती है | डॉ. नायक ने कहा कि आज शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी, कृषि कार्य और उद्योग, सभी की निर्भरता भूजल पर बढ़ी है I डॉ नायक ने केन्द्रीय भूजल-बोर्ड की स्थापना उनके कार्यों और उद्देश्यों के बारे में विस्तरपूर्वक जानकारी दी| डॉ. नायक ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सबसे अधिक भूजल का ऊपयोग होता है जिसमे प्रति किलोग्राम चांवल के उत्पादन में लगभग 1500 से 2000 लीटर जल की खपत होती है I उन्होंने चांवल के उत्पादन को आवश्यकता अनुसार करने तथा अन्य फसलों जिनमें पानी की खपत कम है, के उत्पादन पर जोर दिया I श्री नायक ने भूजल की रिचार्जिंग हेतु किये जा रहे प्रयासों एवं नवाचार की जानकारी दी | डॉ नायक ने छत्तीसगढ़ के क्षेत्रवार भूजल स्थिति और चिंताजनक इलाकों की भी जानकारी दी I श्री नायक ने साउथ अफ्रीका के डर्बन शहर तथा भारत के बैंगलोर में अत्यधिक भूजल के दोहन से उत्पन्न चिंताजनक स्थिति के बारे में भी अपने विचार साझा किये I
द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के भिलाई केंद्र के अध्यक्ष श्री पुनीत चौबे ने अपने उदबोधन में कहा कि सन 1950 से आज तक पूरे विश्व में लगभग 9.2 बिलियन टन प्लास्टिक का उत्पादन हुआ है जिसमे अनुमान है कि लगभग 7 बिलियन टन प्लास्टिक, कचरा बन गया जो की अत्यंत गंभीर और चिंता का विषय है | उन्होंने कहा कि इसमें से जिस भी प्लास्टिक कचरा का विधिवत निपटान नहीं हुआ है वह समुद्र के जीव जंतुओं से लेकर जमीन पर मौजूद जीव जंतुओं के अस्तित्व के लिए बहुत बड़ी चुनौती है | श्री चौबे ने कहा कि प्लास्टिक कचरा न सिर्फ ख़राब दिखता है अपितु यह भूमि को भी प्रदूषित कर उसकी उर्वरता को भी कम कर रहा है |
इंस्टीट्यूशन ऑफ प्लांट इंजीनियर्स छत्तीसगढ़ चैप्टर के उपाध्यक्ष श्री बी पी यादव ने कहा कि प्लास्टिक प्रदुषण रोकने के लिए शासन एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को आम लोगों में जागरूकता लाने की जरुरत है तथा उपलब्ध प्लास्टिक कचरे के निष्पादन एवं पुनरुपयोग हेतु और अधिक तकनीक के विकास की आवश्यकता है |
इस अवसर पर रुंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने प्लास्टिक कचरे को वर्गीकृत कर एक प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शाया तथा प्लास्टिक कचरे से ब्रिक बनाने की विधि बताई | श्री शंकराचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने स्वनिर्मित पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक साइकिल का भी प्रदर्शन किया |
कार्यक्रम में प्रदीप तिवारी, पूर्व अध्यक्ष द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) भिलाई शाखा, एस वी नंदनवार , पूर्व मुख्य महाप्रबंधक (नगर सेवा) भिलाई इस्पात संयंत्र,  पी के नियोगी, सचिव आई आई पी ई भिलाई, भिलाई इस्पात संयंत्र, आई आई टी भिलाई, सेट/सेल भिलाई , एन एस पी सी एल , ए सी सी, मेकान के अधिकारी , इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा तथा इंस्टीट्यूशन ऑफ प्लांट इंजीनियर्स छत्तीसगढ़ चैप्टर के सदस्य और भिलाई दुर्ग के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र छात्रा उपस्थित थे।

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