छत्तीसगढ़

सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का किया सम्मान




भिलाई /सेल – भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का उनके रायपुर स्थित निवास पर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी  अनिर्बान दासगुप्ता की ओर से महाप्रबंधक (सम्पर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क)  अमूल्य प्रियदर्शी ने  विनोद कुमार शुक्ल को सम्मानित किया। उनके साथ महाप्रबंधक (सम्पर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) एवं प्रभारी (राजभाषा)  सौमिक डे तथा सहायक महाप्रबंधक (जनसंपर्क)  जवाहर बाजपेयी भी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने श्री शुक्ल को शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित की। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध साहित्यकार  विनोद कुमार शुक्ल के पुत्र, श्री शाश्वत गोपाल शुक्ल भी उपस्थित थे।
मार्च 2025 में  विनोद कुमार शुक्ल को वर्ष 2024 के लिए भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से अलंकृत किया गया। यह उपलब्धि प्राप्त करने वाले वे छत्तीसगढ़ राज्य के पहले साहित्यकार हैं। वर्ष 1961 में स्थापित यह पुरस्कार भारतीय साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
सम्मान समारोह के दौरान श्री शुक्ल ने संयंत्र के अधिकारियों से आत्मीय बातचीत करते हुए अपने साहित्यिक जीवन और अनुभवों को साझा किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “यह बहुत बड़ा पुरस्कार है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे यह पुरस्कार प्राप्त होगा।”
विनोद कुमार शुक्ल का जन्म छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में वर्ष 1937 में हुआ था। हिंदी साहित्य में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनकी साहित्यिक यात्रा 1971 में प्रकाशित कविता संग्रह “लगभग जय हिंद” से आरंभ हुई। उन्हें व्यापक ख्याति उपन्यास “नौकर की कमीज़” (1979) से प्राप्त हुई, जिस पर सुप्रसिद्ध फिल्मकार  मणि कौल ने फिल्म भी बनाई। वर्ष 1997 में प्रकाशित उपन्यास “दीवार में एक खिड़की रहती थी” के लिए उन्हें 1999 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
श्री शुक्ल की रचनाएं अपनी सादगी, गहन संवेदनशीलता और विशिष्ट कथाशैली के लिए जानी जाती हैं। उनके लेखन में जादुई यथार्थवाद की झलक मिलती है, जो सामान्य जीवन की जटिलताओं को सहजता से प्रस्तुत करता है।







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