छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पहली बार सरेंडर नक्सलियों का एक समूह खेती करेगा।

by Umesh Paswan

दंतेवाड़ा ज़िला प्रशासन के इस प्रयास से ही यह संभव हुआ है कि सरेंडर करने वाले नक्सली ना केवल खेती करेंगे, बल्कि ट्रैक्टर भी किराए पर देंगे और उसके बदले उन्हें आय भी होगी. पत्नी के साथ सरेंडर करने वाले 2 लाख के इनामी नक्सली प्रकाश करताम उर्फ पांडू की मांग पर जिला प्रशासन ने उसे ट्रैक्टर दिया है. 8 जुलाई को सरेंडर करने के बाद प्रकाश ने इसकी मांग की थी.

ट्रैक्टर देने से पहले 10 दिन के अंदर प्रकाश के गांव बड़ेगुडरा के आत्मसमर्पित नक्सलियों का स्वयं सहायता समूह ‘जय लय्योर जय कम्माई’ यानी ‘नौजवान अब खेती करेंगे’ समूह बनाया गया. इसमें गांव के ही 10 सरेंडर नक्सलियों को जोड़ा गया. हरेली तिहार के दिन इस ग्रुप को जिला प्रशासन ने ट्रैक्टर की चाबी सौंप दी. सरेंडर नक्सली प्रकाश अपने साथियों के साथ जैसे ही ट्रैक्टर पर बैठा खुशी के चलते उसने आधा घंटे तक उसने स्टियरिंग ही नहीं छोड़ा.

सरेंडर नक्सलियों का मनोबल बढ़ाने ज़िले के एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव खुद ट्रैक्टर पर बैठे और महिला आजीविका परिसर से बाहर मुख्य सड़क तक गए. मांग पूरी होने पर सरेंडर नक्सली प्रकाश ने कहा, “अब मैं खेती करूंगा. समूह के साथ काम करूंगा. नक्सलवाद में हिंसा और दर्द के अलावा कुछ भी नहीं रखा है. असली खुशियां अब मिल रही हैं.”

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ का पहला शहर जहां नक्सलियों का स्वयं समूह बना

दंतेवाड़ा ज़िले के कलेक्टर दीपक सोनी ने कहा, “सरेंडर नक्सलियों का यह पहला स्वयं सहायता समूह है. ट्रैक्टर से खेती कर और किराए पर देकर वे रोजगार कमाएंगे.” अफसरों का दावा है कि सरेंडर नक्सलियों का ग्रुप बनाकर ट्रैक्टर उपलब्ध कराने वाला दंतेवाड़ा प्रदेश का पहला जिला है.

दंतेवाड़ा के चिकपाल और पोटाली इलाके के सरेंडर करने वाले नक्सलियों का भी ग्रुप बनेगा. जिन्हें 15 अगस्त के दिन ट्रैक्टर दिया जाएगा. ताकि वे खेती किसानी कर खुशहाल जीवन बिताएं.

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