श्रीराम मंदिर भूमिपूजन का कार्य पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हो इसके लिए आवश्यक था कि सम्पूर्ण भारत के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों से पवित्र मिट्टी और जल लाया जाए और इस कार्य में एक मात्र कमी को पूरा करने के लिए यह अत्यावश्यक था कि पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित पवित्र शारदा पीठ की मिट्टी भी लाई जाए । वहां शारदा पीठ का हजारों वर्ष पुराना मंदिर है,बताया जाता है , जिसे सम्राट अशोक के शासनकाल में स्थापित किया गया था। यह मंदिर कश्मीरी पंडितों के तीन प्रसिद्ध पवित्र स्थलों में से एक है। हालांकि आज शारदा मंदिर पूरी तरह खंडहर हालत में है
ऐसे में शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी भारत लाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कर्नाटक के श्री वेंकटेश रमन और उनकी पत्नी श्रीमती सुजाता को सौंपी गई । वेंकटेश अपनी पत्नी के साथ चीन में रहते हैं। सेवा शारदा पीठ ने इस महत्वपूर्ण काम के लिए उनसे संपर्क किया।
इस दंपति ने अपने चीन के पासपोर्ट पर पीओके जाकर शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी भारत तक पहुंचाने के कार्य को श्रीराम काज के पुण्य शाली आदेश का अहो भाग्य माना और उन्होंने हर तरह के खतरे को स्वीकार करते हुए इसे बड़े जतन से पूरा किया।
सबसे बड़ी कठिनाई ये थी कि शारदा पीठ कैसे पहुंचा जाए चूंकि पीओके पर पाक सेना सख्त निगाह रखती है और वहां से लंबे समय से भारत विरोधी कार्रवाई संचालित की जा रही है पीओके में भारतीय नागरिकों को जाने की अनुमति भी नहीं है। इसलिए भारत से कोई वहां जाकर शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी नहीं ला सकता था अतः इस कार्य के लिए यह तय किया गया कि किसी ऐसे समर्पित दंपत्ति को चुना जाए जो चीन में निवास कर रहा हो। जब इस हेतु खोज आरंभ हुई तो कर्नाटक निवासी श्री वेंकटेश दंपत्ति आगे आए, फिर शुरू हुआ ये पवित्र अभियान ।
चीन के पासपोर्ट के आधार पर ये दंपत्ति हांगकांग से पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद पहुंचे। वहां से वेंकटेश तथा उनकी पत्नी दर्शन और पूजा अर्चना के लिए शारदा पीठ गए और वहां का प्रसाद व पवित्र मिट्टी इकट्ठा की।
72 साल बाद पहली बार पीओके में मां शारदा पीठ शक्ति स्थल पर किसी हिंदू श्रद्धालु ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की थी।
इसके बाद श्री वेंकटेश और उनकी धर्म पत्नी
श्रीमती सुजाता शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी व प्रसाद लेकर हांगकांग होते हुए दिल्ली पहुंचे। दिल्ली पहुंचने के बाद वेंकटेश और उनकी पत्नी ने सेवा शारदा पीठ को लाई गई मिट्टी व प्रसाद सौंपा
दिल्ली से शारदा पीठ के प्रतिनिधि मिट्टी व प्रसाद लेकर अयोध्या पहुंचे और इस तरह श्रीराम मन्दिर शिलान्यास का विधिवत आयोजन संपन्न हुआ।