बदलते दौर में पत्रकारिता की चुनौतियाँ और पत्रकारों के हित
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता आज गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। तकनीकी विकास, राजनीतिक दबाव, कॉरपोरेट प्रभाव और सामाजिक परिवर्तन ने पत्रकारिता के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे समय में पत्रकारिता की स्वतंत्रता के साथ-साथ पत्रकारों के हितों की रक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है।
वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती मीडिया पर बढ़ता दबाव है। सत्ता, पूंजी और विज्ञापन के प्रभाव ने निष्पक्ष पत्रकारिता को कमजोर किया है। कई बार सच दिखाने वाले पत्रकारों को धमकी, मुकदमे, या हिंसा का सामना करना पड़ता है। इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
डिजिटल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने खबरों की रफ्तार तो बढ़ाई है, लेकिन फर्जी खबरों (फेक न्यूज़) की समस्या भी गंभीर हुई है। टीआरपी और क्लिक की दौड़ में तथ्यात्मक और जनहितकारी पत्रकारिता पीछे छूटती जा रही है। इससे पत्रकारों की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है।
पत्रकार हितों की बात करें तो नौकरी की असुरक्षा, कम वेतन और अनुबंध आधारित नियुक्तियां आज आम समस्या हैं। कई संस्थानों में श्रम कानूनों और वेतन बोर्ड की सिफारिशों का पालन नहीं हो रहा। कार्यस्थल पर सुरक्षा, बीमा और सम्मानजनक सेवा शर्तों का अभाव पत्रकारों के मनोबल को कमजोर करता है।
इसके अलावा, मैदानी पत्रकारिता करने वाले संवाददाताओं को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, लेकिन उनके लिए पर्याप्त सुरक्षा और कानूनी संरक्षण उपलब्ध नहीं है। महिला पत्रकारों के सामने कार्यस्थल पर सुरक्षा और समान अवसर की अतिरिक्त चुनौती भी बनी हुई है।
इन चुनौतियों के बीच जरूरी है कि पत्रकारिता अपने मूल मूल्यों—सत्य, निष्पक्षता और जनहित—को न छोड़े। पत्रकार संगठनों को मजबूत करना, पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करना, और मीडिया संस्थानों में पारदर्शी नीतियां अपनाना समय की मांग है।
निष्कर्षतः, चुनौतीपूर्ण दौर में पत्रकारिता की साख बचाने के लिए पत्रकारों के हितों की रक्षा अनिवार्य है। जब पत्रकार सुरक्षित, स्वतंत्र और सम्मानित होंगे, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा और समाज को सच्ची दिशा मिल सकेगी।




