अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस आज: जागरूक उपभोक्ता ही शोषण से बचाव का सबसे बड़ा हथियार
हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में ग्राहक, अधिकारों की जानकारी और सतर्कता से ही मिल सकती है न्यायपूर्ण बाजार व्यवस्था
हर व्यक्ति अपनी आजीविका के लिए कभी कर्मचारी, कभी व्यवसायी, कभी उत्पादक या अधिकारी की भूमिका निभाता है, लेकिन इन सभी भूमिकाओं से अलग होते ही वही व्यक्ति एक उपभोक्ता बन जाता है। वस्तुतः इस धरती पर रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में ग्राहक है।
हर वर्ष 15 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और यह सुनिश्चित करना है कि बाजार व्यवस्था में उनके हितों की रक्षा हो। इस दिवस को मनाने की शुरुआत वर्ष 1983 में Consumers International द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर के उपभोक्ताओं को यह बताना था कि उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उनके कौन-कौन से अधिकार हैं और सरकारों की क्या जिम्मेदारियां हैं।
समाज का प्रत्येक व्यक्ति उपभोक्ता है, फिर भी विडंबना यह है कि सबसे अधिक शोषण भी उसी का होता है। अर्थव्यवस्था में ग्राहक को राजा कहा जाता है, क्योंकि वही यह तय करता है कि उसे क्या खरीदना है। लेकिन आज की बदलती बाजार व्यवस्था में स्थिति कुछ अलग दिखाई देती है—अब बाजार ही यह तय करने लगा है कि ग्राहक को क्या खरीदना चाहिए।
दैनिक जीवन में कई बार उपभोक्ता अनजाने में अपने अधिकारों की अनदेखी कर देता है। उदाहरण के तौर पर, दुकानदार कई बार चिल्लर न होने का बहाना बनाकर ग्राहक को चॉकलेट या अन्य वस्तु थमा देता है। इसी तरह होटल या रेस्तरां में अक्सर पूछा जाता है कि पानी “रेगुलर” चाहिए या “बोतल वाला”, जबकि नियमों के अनुसार किसी भी होटल या पेट्रोल पंप पर स्वच्छ पेयजल और शौचालय की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
त्योहारों के दौरान मिठाई खरीदते समय भी कई बार ग्राहक यह नहीं देखता कि मिठाई के डिब्बे का वजन भी मिठाई के साथ जोड़कर ही वसूला जा रहा है। वहीं बच्चों के स्कूल प्रवेश के समय भी कई प्रकार की अनावश्यक फीस के रूप में अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जाता है।
इसी प्रकार एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) को बहुत से लोग वस्तु की वास्तविक कीमत मान लेते हैं, जबकि यह केवल अधिकतम सीमा होती है। दुकानदार इससे अधिक कीमत नहीं ले सकता, लेकिन कई बार एमआरपी वास्तविक बिक्री मूल्य से अधिक छपी होती है और जानकारी के अभाव में ग्राहक अधिक भुगतान कर देता है।
अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त, स्वास्थ्य सेवाएं, दवाइयां, टेलीकॉम सेवाएं, गैस सिलेंडर में कम मात्रा, पेट्रोल पंप पर कम पेट्रोल, आभूषणों की शुद्धता और वजन जैसे अनेक क्षेत्र ऐसे हैं जहां उपभोक्ताओं को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है।
सरकार भी उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने के लिए विभिन्न प्रयास कर रही है। “जागो ग्राहक जागो” जैसे अभियान इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके साथ ही अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जैसे स्वयंसेवी संगठन भी उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और जागरूकता फैलाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस के अवसर पर यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम एक जागरूक और सतर्क उपभोक्ता बनेंगे। क्योंकि सच ही कहा गया है—
“ग्राहक तू रहेगा मौन, तो तेरी सुनेगा कौन।”
जागरूक उपभोक्ता ही एक स्वस्थ, पारदर्शी और न्यायपूर्ण बाजार व्यवस्था की मजबूत नींव बन सकता है।




