प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदारी व्यवस्था के भरोसे सूरजपुर बिजली विभाग, सब-स्टेशन की हालत जर्जर
सूरजपुर : सूरजपुर जिले में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। सब-स्टेशन में बढ़ती अव्यवस्था, कर्मचारियों के शोषण और अधिकारियों की उदासीनता के कारण न सिर्फ शहर की बिजली व्यवस्था बदहाल है, बल्कि किसी बड़ी दुर्घटना का अंदेशा भी बना हुआ है।
**सब-स्टेशन बना झाड़ियों का अड्डा, दुर्घटना का खतरा**
सूरजपुर स्थित बिजली विभाग के सब-स्टेशन की स्थिति मेंटेनेंस के अभाव में दयनीय हो चुकी है। परिसर में चारों ओर उगी लंबी घास और झाड़ियों ने सब-स्टेशन को घेर रखा है। इसके कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। रख-रखाव पर ध्यान न दिए जाने से स्थानीय निवासियों और परिसर में तैनात ऑपरेटरों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
**ठेकेदारी प्रथा और ऑपरेटरों का शोषण**
सब-स्टेशन में लाइन चालू और बंद करने का काम ठेके के ऑपरेटरों के भरोसे है। इन कर्मचारियों को विभाग की ओर से मिलने वाली सुविधाओं का कोई लाभ नहीं मिलता; वे केवल ठेकेदार से मिलने वाले सीमित ईपीएफओ और ईएसआईसी के भरोसे काम करने को मजबूर हैं। आरोप हैं कि अधिकारी और ठेकेदार मिलकर कर्मचारियों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं। यदि परिसर में कोई दुर्घटना होती है, तो विभाग जिम्मेदारी ठेकेदार पर डालकर पल्ला झाड़ने की फिराक में रहता है।
**रक्षाबंधन पर सड़क पर उतरे नगरवासी, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई शून्य**
बिजली की बार-बार कटौती से त्रस्त होकर नगरवासियों को रक्षाबंधन जैसे त्योहार के दिन सूरजपुर के अग्रसेन चौक पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
इससे पूर्व, सहायक अभियंता (AE) के खिलाफ निविदा घोटाले से संबंधित शिकायतों के दस्तावेज पत्रकारों द्वारा मुख्य अभियंता (अम्बिकापुर) और प्रबंध निदेशक (रायपुर) को भेजे गए थे। हालांकि, शिकायतों के बावजूद अधिकारी को उनके गृह जिले सूरजपुर में ही पदस्थ रहने दिया गया, जिससे प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठ रहे हैं।
**प्रबंध निदेशक कार्यालय (मुख्यालय) की व्यवस्था पर भी उठे सवाल**
विभागीय सूत्रों और स्थानीय जनमानस का कहना है कि जब रायपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय में एक ही व्यक्ति बीते 25 वर्षों से भृत्य के पद पर पदस्थ है, तो यह दर्शाता है कि विभाग का ढांचा किस हद तक शिथिल हो चुका है। जब मुख्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पा रहा, तो प्रदेश के अन्य दूरस्थ कार्यालयों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
जागरूक नागरिकों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि सब-स्टेशन के मेंटेनेंस, कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और शिकायतों पर त्वरित निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।




