छत्तीसगढ़ में तीसरे विकल्प की तलाश, बसपा के पुराने चुनावी आंकड़े फिर चर्चा में
उमेश पासवान विशेष रिपोर्टर
दुर्ग। छत्तीसगढ़ की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले के साथ तीसरे राजनीतिक विकल्प की चर्चा समय-समय पर होती रही है। इस संदर्भ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का चुनावी इतिहास महत्वपूर्ण है। राज्य गठन के बाद हुए विधानसभा चुनावों में बसपा ने लगातार चुनाव मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और कई चुनावों में विधानसभा सीटें भी हासिल कीं। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में छत्तीसगढ़ के 2003 से 2023 तक के विधानसभा चुनावों के आंकड़े उपलब्ध हैं।
2003 के पहले विधानसभा चुनाव में बसपा ने 54 सीटों पर चुनाव लड़कर 4,29,334 वोट हासिल किए थे। उसका मत प्रतिशत 4.45 प्रतिशत रहा और पार्टी ने दो विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की। उस चुनाव में भाजपा को 50 और कांग्रेस को 37 सीटें मिली थीं, जबकि एनसीपी ने एक सीट जीती थी। इस लिहाज से बसपा ने राज्य की पहली विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन और मजबूत दिखाई दिया। पार्टी ने सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 6,56,210 वोट हासिल किए। उसका वोट शेयर 6.11 प्रतिशत रहा और दो सीटों पर उसके उम्मीदवार विजयी हुए। उस चुनाव में भाजपा 50 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, कांग्रेस को 38 सीटें मिलीं और बसपा दो सीटों के साथ विधानसभा पहुंची। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो के चुनावी आंकड़ों में भी बसपा के 6.11 प्रतिशत मत और दो सीटों की पुष्टि होती है।
2013 में बसपा का मत प्रतिशत घटकर 4.27 प्रतिशत रहा, लेकिन पार्टी एक विधानसभा सीट जीतने में सफल रही। उसे कुल 5,58,424 वोट मिले। उस चुनाव में भाजपा ने 49 और कांग्रेस ने 39 सीटें जीतीं, जबकि बसपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार को एक-एक सीट मिली।
2018 का चुनाव तीसरे राजनीतिक विकल्प की बहस के लिहाज से अलग रहा। उस चुनाव में बसपा ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के साथ गठबंधन किया था। बसपा को प्रदेश में 5,52,313 वोट यानी लगभग 3.87 प्रतिशत मत मिले और उसने दो विधानसभा सीटें जीतीं। इसी चुनाव में कांग्रेस को 68, भाजपा को 15 और बसपा को दो सीटें मिलीं।
2023 के विधानसभा चुनाव में बसपा का राज्यव्यापी मत प्रतिशत घटकर 2.05 प्रतिशत रह गया। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पार्टी ने 59 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, 3,19,903 वोट हासिल किए और कोई सीट नहीं जीत सकी।
इन आंकड़ों को एक साथ देखें तो बसपा का चुनावी आधार स्थिर नहीं रहा है, लेकिन पार्टी का छत्तीसगढ़ में पुराना राजनीतिक इतिहास जरूर है। 2003 में 4.45 प्रतिशत मत और दो सीटों से शुरुआत करने वाली बसपा ने 2008 में 6.11 प्रतिशत मत हासिल किए। 2013 में उसका मत प्रतिशत 4.27 रहा और 2018 में गठबंधन के साथ दो सीटें मिलीं। वहीं 2023 में मत प्रतिशत 2.05 तक पहुंच गया।
ऐसे में छत्तीसगढ़ में तीसरे विकल्प की चर्चा करते समय बसपा के इन आंकड़ों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि आंकड़े यह भी बताते हैं कि बसपा की राज्यव्यापी चुनावी ताकत अलग-अलग चुनावों में काफी बदली है। इसलिए आने वाले चुनावों में उसकी भूमिका का आकलन पुराने आंकड़ों के साथ वर्तमान संगठन, क्षेत्रवार जनाधार, उम्मीदवारों और संभावित राजनीतिक गठबंधनों के संदर्भ में करना होगा।
छत्तीसगढ़ की चुनावी राजनीति में तीसरे विकल्प की बहस केवल किसी एक दल तक सीमित नहीं रही है। अलग-अलग समय में क्षेत्रीय और सामाजिक आधार वाले दलों ने भी अपनी राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश की है। ऐसे में बसपा के पुराने मत प्रतिशत और सीटों का रिकॉर्ड यह जरूर बताता है कि भाजपा-कांग्रेस के अलावा राजनीतिक स्थान बनाने की कोशिश प्रदेश की राजनीति में पहले भी हुई है और उसमें बसपा ने कई बार विधानसभा स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
चुनावी आंकड़े एक नजर में: 2003—4.45% वोट, 2 सीट; 2008—6.11% वोट, 2 सीट; 2013—4.27% वोट, 1 सीट; 2018—3.87% वोट, 2 सीट; 2023—2.05% वोट, 0 सीट।




