CSPDCL में फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर ‘साहब’ मौन! मुख्य अभियंता के आदेश ठेंगे पर, सूरजपुर से बलरामपुर तक फैला टेंडर घोटाले का जाल
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) में अधिकारियों की मनमानी, भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। आलम यह है कि खुद मुख्य अभियंता (अंबिकापुर) द्वारा जारी लिखित आदेशों को भी अधीनस्थ अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं और उच्च प्रबंधन चुप्पी साधे मूकदर्शक बना बैठा है।
सूरजपुर/बलरामपुर/अंबिकापुर:
15 दिनों में मांगी थी जांच रिपोर्ट, बीत गए महीने!
सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत प्राप्त आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, मुख्य अभियंता (अं/क्षे) कार्यालय, अंबिकापुर द्वारा आदेश क्रमांक 70 (दिनांक 09/06/2026) जारी किया गया था। इस आदेश में सूरजपुर जिले के पत्रकार रोहित पासवान द्वारा कार्यपालन अभियंता (सं/सं) सूरजपुर कार्यालय में पदस्थ सहायक अभियंता और लाइनमेन (संविदा) पर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की शिकायत पर दो सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति में श्री आर० के ० चंद्राकर (अधीक्षण अभियंता) क्षत्रिय कार्यलय अम्बिकापुर और श्री कामेन्द्र सिंह (कार्यपालन यंत्री) परियोजना कार्यालय अम्बिकापुर को शामिल कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था।

लेकिन विडंबना देखिए, मुख्य अभियंता के आदेश के बावजूद आज दिनाँक 05/10/2026 को पूरे 3 महीना 26 दिन हो गए लेकिन अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 15 दिन की सीमा कब की बीत चुकी है, लेकिन जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का अता-पता नहीं है।
सूरजपुर ही नहीं, बलरामपुर कार्यालय भी टेंडर घोटाले की ज़द में
सूत्रों और उठ रहे सवालों की मानें तो निविदा में धांधली का यह खेल केवल सूरजपुर जिले तक सीमित नहीं है। बलरामपुर स्थित कार्यपालन यंत्री (परियोजना) CSPDCL कार्यालय में भी टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां और घोटाले सामने आ रहे हैं। लगातार खबरें उजागर होने और शिकायतें सामने आने के बाद भी बिजली विभाग के उच्च अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं, जिससे विभाग की पूरी निविदा प्रक्रिया की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रबंध निदेशक (MD) की रहस्यमयी चुप्पी पर उठे सवाल
पूरे मामले की जानकारी प्रबंध निदेशक (MD) के संज्ञान में होने के बावजूद उनकी निष्क्रियता और चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आखिर क्यों इतने बड़े टेंडर घोटालों पर कोई कड़ा रुख नहीं अपनाया जा रहा?
प्रबंध निदेशक कार्यालय की कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके अपने ही कार्यालय में एक चपरासी (प्यून) पिछले 25 वर्षों से एक ही स्थान पर जमा हुआ है। शासन की स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जब मुख्यालय में ही नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ रही हों, तो फिर ज़िला स्तर के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की उम्मीद ही कैसे की जा सकती है?
जनता में आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांग
बिजली विभाग में जारी इस बंदरबांट, स्थानांतरण नीति के उल्लंघन और टेंडर घोटालों को लेकर आम जनता और निष्पक्ष कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस सोए हुए महकमे और मौन बैठे जिम्मेदार अधिकारियों पर कब चाबुक चलाता है या फिर यह भ्रष्टाचार यूं ही कागजों में दबता रहेगा।




