CSPDCL खुलासा पार्ट-2: खबर के असर से जांच टीम तो पहुंची, पर ‘साहब’ सबूत मिटाने में व्यस्त! घोटालेबाज अफसर को ही थमाया प्रभार!
सूरजपुर/अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) में समाचार चलने के बाद हड़कंप तो मचा, लेकिन भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का खेल बंद नहीं हुआ। समाचार में मामला प्रमुखता से उजागर होने के बाद **06/10/2026** को आखिरकार जांच समिति बिजली विभाग के सूरजपुर कार्यालय जांच करने पहुंची। लेकिन इस जांच के पीछे की हकीकत और भी ज्यादा चौंकाने वाली और संदिग्ध नजर आ रही है।
### जिसे कटघरे में होना था, उसी को दे दिया प्रभार!
जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि सूरजपुर कार्यालय में जब निविदा (टेंडर) में भारी गड़बड़ी की गई थी, उस दौरान वहां **सहायक अभियंता बी. एस. मरकाम** पदस्थ थे। आरोप है कि बी. एस. मरकाम ने लाइनमैन के साथ मिलीभगत करके निविदा प्रक्रिया में बड़ी धांधली को अंजाम दिया था।
इसके बाद कनिष्ठ अभियंता **सरिता कुजूर** को पदोन्नति देकर सहायक अभियंता के पद पर पदस्थ किया गया। वर्तमान में सरिता कुजूर 1 वर्ष की मैटरनिटी (प्रसूति) छुट्टी पर हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि उनके छुट्टी पर जाते ही निष्पक्ष जांच कराने की बजाय, टेंडर घोटाले के मुख्य आरोपी **बी. एस. मरकाम को ही पुनः सहायक अभियंता का अतिरिक्त (एडिशनल) प्रभार सौंप दिया गया!**
सबूत और साक्ष्य मिटाने की साजिश? जांच टीम ने भी साधी चुप्पी!
एक गंभीर घोटाले में संलिप्त अधिकारी को ही वापस उसी पद की चाबी सौंप देना सीधे तौर पर **साक्ष्यों और सबूतों को मिटाने की खुली साजिश** की ओर इशारा करता है।
अचरज की बात यह है कि जब जांच टीम 6 अक्टूबर को सूरजपुर कार्यालय पहुंची, तो उन्होंने इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और हितों के टकराव को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। जिस अधिकारी पर धांधली के आरोप हैं, वह जांच के समय उसी कुर्सी पर बैठकर फाइलों को प्रभावित करने की स्थिति में था, फिर भी जांच टीम ने इस पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की।
इतनी शिकायतों के बाद भी प्रबंध निदेशक (MD) मौन क्यों?
लगातार सबूत सामने आने, जांच समिति के गठन होने और गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक कोई ठोस व दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल प्रबंध निदेशक (MD) की रहस्यमयी चुप्पी पर खड़ा हो रहा है।
क्या प्रबंध निदेशक के संरक्षण में यह सब खेल चल रहा है? या फिर भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उच्च प्रबंधन भी कार्रवाई करने से कतरा रहा है? सूरजपुर से लेकर अंबिकापुर और बलरामपुर तक बिजली विभाग की साख तार-तार हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख और कान बंद किए कुर्सी का लुत्फ उठा रहे हैं।




