प्रशासनिक मनमानी और नियमों की धज्जियाँ: सूरजपुर श्रम कार्यालय में बिना जाँच संविदा अवधि समाप्त होने के बावजूद सेवा वृद्धि का गंभीर मामला आया सामने
शिकायत की प्रतिलिपि मिलने के बाद भी श्रम पदाधिकारी रहे निष्क्रिय; वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार कर कलेक्टर महोदया को भेजा गया नोटशीट
सूरजपुर (छत्तीसगढ़) जिला सूरजपुर स्थित श्रम विभाग कार्यालय में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम, 2012 एवं नियुक्ति की शर्तों का सरेआम उल्लंघन करते हुए घोर प्रशासनिक अनियमिता और कर्तव्य में स्वेच्छाचारिता का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है।
प्राप्त जानकारी और उच्चाधिकारियों को प्रस्तुत शिकायत पत्र के अनुसार, श्रम कार्यालय सूरजपुर में पदस्थ श्रम कल्याण निरीक्षक (संविदा) की संविदा सेवा अवधि मार्च 2026 में ही विधिपूर्वक समाप्त हो चुकी है। आदेश क्रमांक `/ 426 / श्र.आ. / 2025 सूरजपुर` (दिनांक 04/06/2025) एवं कलेक्टर सूरजपुर के आदेश क्रमांक `397` (दिनांक 19.03.2013) में स्पष्ट रूप से उल्लिखित नियमों के तहत संविदा नियुक्ति की अवधि स्वतः समाप्त मानी जाती है। सेवा अवधि समाप्त होने के उपरांत संबंधित कर्मचारी वैधानिक रूप से कार्यालय में कार्य करने हेतु अधिकृत नहीं था।
शिकायत पर संज्ञान लेने के बजाय नियमों की अनदेखी
इस गंभीर विषय को लेकर रोहित पासवान (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) द्वारा दिनांक 06/07/2026 को श्रम पदाधिकारी, सूरजपुर को विधिवत प्रतिलिपि (पावती दिनांक 09/07/2026) सौंपते हुए वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया था तथा कलेक्टर महोदया सूरजपुर को भी शिकायत प्रस्तुत कर निष्पक्ष जाँच की माँग की गई थी।
परंतु अत्यंत खेदजनक एवं संदेहास्पद विषय यह है कि शिकायत की पावती प्राप्त होने के बावजूद श्रम अधिकारी (सूरजपुर) द्वारा न तो कोई प्राथमिक जाँच की गई और न ही नियमों के विपरीत पद पर बने रहने के औचित्य पर कोई प्रश्न उठाया गया। इसके विपरीत, कार्यालयीन जवाबदेही और वैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए बिना किसी निष्पक्ष जाँच अथवा पुनरावलोकन के, संबंधित संविदा कर्मचारी की सेवा वृद्धि हेतु विभागीय नोटशीट तैयार कर अनुमोदन के लिए सीधे कलेक्टर महोदया की ओर अग्रेषित कर दी गई और तत्पश्चात सेवा में वृद्धि भी करा दी गई।
विभागीय कार्यप्रणाली और वैधानिक प्रावधानों पर उठे गंभीर प्रश्न
1. सिविल सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन: छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम, 2012 के तहत संविदा शर्तों की अवधि समाप्त होने के उपरांत बिना सक्षम प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन अथवा प्रक्रियात्मक पुनरीक्षण के कार्य किया जाना विधि-विरुद्ध एवं अधिकार-क्षेत्र से बाहर है।
2. कर्तव्य में घोर लापरवाही एवं पदीय दुरुपयोग:जब एक ज़िम्मेदार अधिकारी स्व-हित अथवा अपने अधीनस्थ कर्मचारी के सेवा-विस्तार हेतु समय पर वैधानिक प्रक्रिया का पालन करने में विफल रहता है और शिकायतों को दरकिनार करता है, तो यह कृत्य उनकी निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
3. श्रमिकों के अधिकारों पर कुठाराघात: जो श्रम विभाग जिले के निर्धन श्रमिकों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने हेतु उत्तरदायी है, उसी विभाग द्वारा नियम-विरुद्ध कार्यप्रणाली अपनाना श्रमिकों के अधिकारों के प्रति घोर उदासीनता को दर्शाता है।
उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच एवं कठोर कार्यवाही की माँग
इस संपूर्ण प्रकरण ने जिला प्रशासन सूरजपुर की कार्यप्रणाली पर गंभीर वैधानिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जागरूक नागरिकों एवं शिकायतकर्ता ने माँग की है कि संविदा पद की आवश्यकता का पुनः पुनरावलोकन किया जाए, नियमों की अनदेखी कर नोटशीट आगे बढ़ाने वाले संबंधित उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक व कानूनी कार्यवाही की जाए, तथा बिना जाँच स्वीकृत की गई सेवा वृद्धि के आदेश को तत्काल निरस्त कर निष्पक्ष जाँच के आदेश दिए जाएँ।




