छत्तीसगढ़दुर्ग-भिलाई

सीएसवीटीयू में अनुसंधान प्रस्ताव निधिकरण और अवसर विषय एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न

विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, और कौशल विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी, शोधकर्ताओं को वित्तीय सहायता और वैश्विक अवसरों का मिला मार्गदर्शन
       दुर्ग। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के यूटीडी परिसर में 10 सितम्बर 2024 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय अनुसंधान प्रस्ताव निधिकरण और अवसर था। इस कार्यशाला का उद्देश्य शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और छात्रों को अनुसंधान परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने और विभिन्न अवसरों की जानकारी प्रदान करना था। कार्यशाला की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसमें सभी विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की। इसके बाद, डॉ. पी. के. घोष, निदेशक, यूटीडी, सीएसवीटीयू ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवाचारों के लिए सही मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता बहुत जरूरी होती है, और यह कार्यशाला इस दिशा में पहला कदम है। यह कार्यशाला माननीय कुलपति डॉ. एम. के. वर्मा के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यशाला के संरक्षक डॉ. संजय अग्रवाल, प्रोवाइस चांसलर, सीएसवीटीयू, भिलाई थे।
       कार्यशाला के पहले सत्र में डॉ. संजय कुमार मिश्रा (वैज्ञानिक-एच, भारत सरकार) ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की योजनाओं का अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने ष्विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी और समझाया कि कैसे शोधकर्ता और शैक्षणिक संस्थान इन योजनाओं से लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने अनुसंधान परियोजनाओं के लिए सही प्रस्ताव कैसे तैयार किया जाए, इस पर भी सुझाव दिए। डॉ. मनोज सिंह रोहिल्ला (वैज्ञानिक-एफ, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार) ने मानव संसाधन विकास कार्यक्रमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारे पास बहुत सी योजनाएं हैं जो शोधकर्ताओं और छात्रों को उनकी अनुसंधान परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान करती हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक प्रतिभाओं को पोषित करना और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। डॉ. विनीता चौधरी (वैज्ञानिक-ई, जैव प्रौद्योगिकी विभाग) ने अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग भारत और अन्य देशों के बीच अनुसंधान सहयोग को प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अनुदान और सहयोग के अवसरों पर भी प्रकाश डाला, जिससे शोधकर्ताओं को वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। डॉ. मनोज कुमार (वैज्ञानिक-डी, जैव प्रौद्योगिकी विभाग) ने अनुसंधान एवं विकास योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने शोध एवं विकास परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव तैयार करने के तरीके बताए। उन्होंने यह भी बताया कि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कैसे नवाचार और अनुसंधान से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
       कार्यशाला के दूसरे सत्र में श्री अंकित राणा, प्रमुख अकादमिक, एलएसएसएसडीसी, नई दिल्ली ने नई शिक्षा नीति 2020 और कौशल विकास के साथ इसके संरेखण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एनईपी 2020 के अंतर्गत कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है और इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भी अनुसंधान और कौशल विकास को साथ-साथ बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी बताया कि शोधकर्ता किस प्रकार से इन कार्यक्रमों से लाभान्वित हो सकते हैं।
       कार्यशाला के अंतिम सत्र में डॉ. संजय सक्सेना, महाप्रबंधक और प्रमुख, निवेश, नई दिल्ली ने औद्योगिक और उद्यमिता योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाओं का परिचय दिया। उन्होंने उद्यमिता की चुनौतियों और अनुसंधान को व्यावसायिक रूप में बदलने के अवसरों पर प्रकाश डाला। अंत में डॉ. पंकज कुमार मिश्रा, प्रोफेसर, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एवं बायोइंफॉर्मेटिक्स, सीएसवीटीयू भिलाई ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी प्रतिभागियों को उनके योगदान और सक्रिय भागीदारी के लिए सराहा। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, यूटीडी के निदेशक, सीएसवीटीयू-फोर्टे के निदेशक एवं राज्य के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए शोधकर्ताओं और छात्रों ने प्रवक्ताओ से प्रश्न पूछे एवं इसके उत्तर भी प्राप्त किये, इस प्रोग्राम मे सभी प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कार्यशाला से अनुसंधान के क्षेत्र में वित्तीय सहायता और अवसरों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

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