छत्तीसगढ़ में विवेकानंद जयंती पर ऐतिहासिक जन-आंदोलन
25 जिलों में 104 कार्यक्रम, 14 बड़े आयोजनों के साथ गूंजी ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’
युवा शक्ति के जागरण का बना प्रदेशव्यापी प्रतीक
रायपुर। स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर 12 जनवरी को छत्तीसगढ़ प्रांत में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला, जब प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं शासकीय-अशासकीय महाविद्यालयों में एक साथ ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक खेल या औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं में राष्ट्रचेतना, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी विचारधारा के जागरण का सशक्त माध्यम बना।
छत्तीसगढ़ प्रांत, जिसमें कुल 33 जिले और 5 संभाग—सरगुजा, बिलासपुर, दुर्ग, रायपुर एवं बस्तर शामिल हैं, वहां इस अभियान की व्यापक छाप देखने को मिली। प्रदेश स्तर पर कुल 104 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें से 14 बड़े कार्यक्रम प्रमुख विश्वविद्यालयों, महाविद्यालय परिसरों एवं शहरी केंद्रों में संपन्न हुए। कुल 25 जिलों में यह आयोजन सफलतापूर्वक हुआ, जिसमें हजारों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
विवेकानंद के विचारों से जुड़ी युवा पीढ़ी
‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का मूल उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के उन विचारों को जीवंत करना रहा, जो युवाओं को आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की दिशा में प्रेरित करते हैं। दौड़ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शारीरिक सशक्तता के साथ वैचारिक मजबूती भी राष्ट्रनिर्माण की अनिवार्य शर्त है।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने “स्वदेशी अपनाओ”, “आत्मनिर्भर भारत”, “युवा शक्ति–राष्ट्र शक्ति”, “विवेकानंद अमर रहें” जैसे गगनभेदी नारों के साथ दौड़ पूरी की। इन नारों ने परिसर से लेकर सड़कों तक राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना का वातावरण निर्मित किया।
कुलपतियों और प्राचार्यों की सक्रिय भागीदारी
कई जिलों में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, महाविद्यालयों के प्राचार्यों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं उपस्थित रहकर हरी झंडी दिखाई और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। अपने संबोधन में वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण, युवाओं को दी गई प्रेरणा और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना पर विस्तार से प्रकाश डाला।
शिक्षाविदों ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक और जागरूक राष्ट्रनिर्माता के रूप में गढ़ने में सहायक होते हैं।
प्रदेशव्यापी समन्वय और अनुशासित आयोजन
इस प्रदेशव्यापी आयोजन की विशेषता इसका अनुशासित और योजनाबद्ध क्रियान्वयन रहा। सभी संभागों—सरगुजा, बिलासपुर, दुर्ग, रायपुर और बस्तर—में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्यक्रमों का संचालन किया गया, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसकी प्रभावी पहुंच बनी।
युवाओं में नई ऊर्जा और संकल्प
कार्यक्रम में शामिल युवाओं ने इसे प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। कई छात्र-छात्राओं ने स्वदेशी उत्पाद अपनाने, सामाजिक सेवा में भागीदारी बढ़ाने और आत्मनिर्भरता को जीवन का लक्ष्य बनाने का संकल्प लिया।
सकारात्मक पहल के रूप में सराहा गया आयोजन
शिक्षा जगत, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इस आयोजन को युवाओं के वैचारिक, नैतिक और सामाजिक विकास की दिशा में एक सार्थक और दूरगामी पहल बताया। उनका मानना है कि ऐसे आयोजन यदि निरंतर होते रहें, तो युवा पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध और अधिक सुदृढ़ होगा।
स्वदेशी संकल्प दौड़ ने इस वर्ष विवेकानंद जयंती को केवल एक स्मरण-दिवस न रहने देकर, उसे एक सक्रिय, जीवंत और जन-आंदोलन का रूप दे दिया—जो छत्तीसगढ़ के युवाओं की ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन गया।




