धमधा जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार पर पर्दा? तीन महीने बाद भी शिकायत की जांच नहीं, उठे गंभीर सवाल
दुर्ग। दुर्ग जिले के धमधा जनपद पंचायत क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में कथित रूप से गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य, कम लागत दिखाकर अधिक भुगतान तथा विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन, दुर्ग में 08 अप्रैल 2026 को की गई थी। शिकायत के लगभग तीन महीने बीत जाने के बाद भी यदि जांच शुरू नहीं हुई है और शिकायतकर्ता को कोई जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया है, तो इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं हुए, जबकि भुगतान अधिक राशि का किया गया। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं के उद्देश्य पर भी प्रश्नचिह्न है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायत सीधे कलेक्टर जनदर्शन में प्रस्तुत की गई थी, तब इतने लंबे समय तक जांच लंबित क्यों रही? क्या संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया? क्या स्थलीय निरीक्षण हुआ? यदि नहीं, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
एक ओर सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है और पारदर्शी प्रशासन का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर यदि गंभीर शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, तो सरकार की मंशा और जमीनी अमल के बीच अंतर दिखाई देता है।
यदि शिकायत निराधार है तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए। लेकिन यदि शिकायत में तथ्य हैं और फिर भी कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने जैसी स्थिति पैदा करता है, जिससे जनता का विश्वास कमजोर होता है।
जनहित की मांग है कि दुर्ग जिला प्रशासन इस मामले में तत्काल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए, दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करे तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे। पारदर्शिता और जवाबदेही ही सुशासन की पहचान है; जांच में अनावश्यक विलंब जनहित और प्रशासन—दोनों के लिए चिंताजनक है।
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