सूरजपुर श्रम विभाग में नियमों की धज्जियां: सेवा समाप्त, फिर भी बिना सेवा वृद्धि आदेश कार्य करते रहे श्रम कल्याण निरीक्षक; RTI में भ्रामक जानकारी देने का आरोप
2013 से एक ही स्थान पर जमावड़ा, शिकायतों के बाद भी बिना जांच जुलाई 2026 में दे दी गई सेवा वृद्धि; सक्षम अधिकारी के अनुमोदन पत्र को छुपाने में जुटा विभाग।
सूरजपुर : जिला श्रम कार्यालय सूरजपुर में संविदा नियुक्तियों, सेवा वृद्धि और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बड़ी लापरवाही का मामला उजागर हुआ है। प्राप्त दस्तावेजों एवं RTI से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग में नियमों को ताक पर रखकर संविदा कर्मचारियों को अभयदान दिया जा रहा है।
1. 31 मार्च 2026 को सेवा समाप्त, फिर भी बिना आदेश चलता रहा था काम
कार्यालय श्रम पदाधिकारी सूरजपुर द्वारा जारी आदेश (क्रमांक/426/श्र.अ./2025) के अनुसार, वर्ष 2013 से छ.ग. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के तहत श्रम कल्याण निरीक्षक (संविदा) के पद की नियुक्ति किया गया था। आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि उनकी सेवा वृद्धि 31 मार्च 2026 तक के लिए की गई है।
नियमों के अनुसार 31 मार्च 2026 को सेवा स्वतः समाप्त हो गई थी। इसके बावजूद बिना किसी अग्रिम सेवा वृद्धि आदेश के श्रम कल्याण निरीक्षक कार्यालय में बदस्तूर कार्य करते रहे।
बड़ा सवाल: जब विभाग को श्रम कल्याण निरीक्षक के पद की आवश्यकता थी, तो समय पर वैध सेवा वृद्धि का आदेश क्यों जारी नहीं किया गया? और बिना आदेश के किसी अधिकारी/कर्मचारी से शासकीय कार्य कराया जाना किस प्रशासनिक नियम के तहत उचित है?
2. “जो खुद के अधिकारों के लिए सक्षम नहीं, वह श्रमिकों को क्या न्याय दिलाएगा?”
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जो अधिकारी अपनी सेवा अवधि समाप्त होने के बाद भी बिना किसी वैध आदेश के मौन रहकर कार्य कर रहा है और अपने प्रशासनिक अधिकारों/संविदा स्थिति को लेकर सक्षम नहीं है, वह जिले के असंगठित एवं निर्माण श्रमिकों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ कैसे दिला पाएगा?
3. 2013 से एक ही जगह जमावड़ा और शिकायतों के बाद भी मेहरबानी
श्रम कल्याण निरीक्षक वर्ष 2013 से (लगभग 13 वर्षों से) एक ही स्थान पर लगातार पदस्थ हैं। बार-बार बिना किसी रुकावट के सेवा वृद्धि दिया जाना और शिकायतों के बावजूद बिना किसी निष्पक्ष जांच या विभागीय कार्यवाही के पुनः जुलाई 2026 में सेवा वृद्धि का आदेश जारी कर दिया जाना विभाग की मंशा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
4. RTI में भ्रामक जानकारी और दस्तावेज छुपाने का खेल
सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के अंतर्गत जब जागरूक आवेदकों द्वारा इस सेवा वृद्धि से संबंधित सक्षम अधिकारी (कलेक्टर) के अनुमोदन पत्र, टीप-पंजी व प्रासंगिक दस्तावेज मांगे गए, तो विभाग द्वारा मुख्य दस्तावेजों को छुपाते हुए केवल सेवा वृद्धि की आदेश प्रति थमा दी गई। सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन पत्र उपलब्ध न कराकर भ्रम फैलाने का काम किया जा रहा है।
प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल:
सूरजपुर जिला प्रशासन और श्रम विभाग की इस कार्यप्रणाली ने पारदर्शी शासन के दावों की पोल खोल कर रख दी है। अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी और श्रम आयुक्त इस गंभीर प्रशासनिक चूक और RTI में अधूरी जानकारी देने के मामले में संज्ञान लेकर क्या कार्यवाही करते हैं।



