CSPDCL में बड़ा घालमेल? 25 सालों से एक ही जगह जमे भृत्य पर शिकायत के बाद पत्राचार का ‘खेल’ और धमकी का आरोप
रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक (MD) कार्यालय से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मुख्यालय में ही एक भृत्य (चपरासी) पिछले 25 वर्षों से एक ही पद और स्थान पर पदस्थ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने इसकी लिखित शिकायत प्रबंध निदेशक, अध्यक्ष एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री से की थी।
शिकायत के बाद मुख्य अभियंता (मानव संसाधन/HR), रायपुर द्वारा शिकायतकर्ता को आरोपों की पुष्टि के लिए पत्र जारी किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने डाक द्वारा जवाब भेजा, तो भारतीय डाक के ट्रैकिंग रिकॉर्ड में वह पत्र कार्यालय को प्राप्त (डिलिवर) दिखा रहा था।
**पत्र गायब या जानबूझकर अनदेखी?**
मामले में मोड़ तब आया जब पत्र प्राप्त होने के बावजूद कुछ दिनों बाद मुख्य अभियंता (HR) कार्यालय से शिकायतकर्ता को पुन: ‘स्मरण पत्र’ भेजकर पुष्टि करने को कहा गया। जब शिकायतकर्ता ने दोबारा उसी पते पर पत्र प्रेषित किया, तो डाक विभाग ने “अधूरा पता” बताकर पत्र वापस लौटा दिया। सवाल यह उठता है कि जिस पते पर पहला पत्र सफलतापूर्वक पहुँच गया, वही पता दूसरी बार में “अधूरा” कैसे हो गया? क्या कार्यालय के अंदर ही शिकायत की फाइलों को गायब करने का खेल चल रहा है?
**व्हाट्सएप पर भी MD को भेजा गया पत्र, साधी चुप्पी**
फाइल गायब होने की आशंका को देखते हुए शिकायतकर्ता ने शिकायत पत्र की स्कैन कॉपी सीधे प्रबंध निदेशक (MD) को व्हाट्सएप के माध्यम से भी प्रेषित की थी। आरोप है कि इसके बावजूद शीर्ष प्रबंधन ने इस पर चुप्पी साधे रखी, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
**कॉल पर मिली धमकियाँ **
शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद संबंधित भृत्य के भाई द्वारा विभिन्न नंबरों से फोन करवाकर उन्हें परेशान, भयभीत और धमकाने का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके पास उक्त भृत्य की एक कॉल रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें कथित तौर पर लेन-देन और पैसों की माँग का स्पष्ट जिक्र है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वे जल्द ही इस ऑडियो रिकॉर्डिंग को भी सार्वजनिक करेंगे।
जब राजधानी स्थित बिजली विभाग के प्रदेश मुख्यालय का यह हाल है, तो प्रदेश भर के अन्य मैदानी कार्यालयों में व्यवस्था कैसी होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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*खबर में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा व्यक्त किए गए हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।*




