डीएमएफ से विकास को नई गति, 306.50 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना को मिली मंजूरी स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, कृषि, कौशल विकास और अधोसंरचना पर होगा व्यापक निवेश
जिला खनिज संस्थान न्यास निधि की शासी परिषद की बैठक संपन्न, जनकल्याण और आधारभूत विकास के लिए तैयार हुआ व्यापक रोडमैप
कांकेर।
खनिज प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से शनिवार को जिला खनिज संस्थान न्यास निधि (डीएमएफ) की शासी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए 306.50 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया। इस योजना के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पेयजल, महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, सिंचाई, ऊर्जा तथा आधारभूत अधोसंरचना जैसे अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी।
बैठक में लोकसभा क्षेत्र कांकेर के सांसद भोजराज नाग, अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेण्डी, भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मण्डावी, कांकेर विधायक आशाराम नेताम, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण नरेटी, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत की विशेष उपस्थिति रही। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने की। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं शासी परिषद के सदस्यों ने भी बैठक में भाग लेकर विकास कार्यों पर विस्तृत चर्चा की।
उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
वार्षिक कार्ययोजना के अनुसार 306.50 करोड़ रुपये में से 214 करोड़ रुपये उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कृषि एवं उससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा, महिला एवं बाल कल्याण, पोषण कार्यक्रम, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना, पशुपालन को प्रोत्साहन, युवाओं के लिए कौशल विकास एवं रोजगार के अवसर, वृद्धजन एवं दिव्यांगजन कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, स्वच्छता तथा आवास संबंधी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक में कहा गया कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल विकास कार्य कराना नहीं, बल्कि खनिज प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं विकसित होंगी।
सिंचाई, ऊर्जा और अधोसंरचना के लिए 92.50 करोड़ रुपये
बैठक में अन्य प्राथमिकता वाले विकास कार्यों के लिए 92.50 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इस राशि का उपयोग सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, ऊर्जा विकास, जल विभाजक विकास तथा विभिन्न प्रकार की भौतिक अधोसंरचना के निर्माण में किया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि मजबूत अधोसंरचना किसी भी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की आधारशिला होती है। बेहतर सड़क, सिंचाई, जल संरक्षण और ऊर्जा सुविधाओं से कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।
पंचवर्षीय योजना और बेसलाइन सर्वे पर हुई विस्तृत चर्चा
बैठक में बेसलाइन सर्वे एवं गैप एनालिसिस के आधार पर तैयार की गई पंचवर्षीय विकास योजना और वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही डीएमएफ की अक्षय निधि के रूप में 10 प्रतिशत राशि सुरक्षित रखने के प्रावधान पर भी चर्चा की गई।
कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मण्डावी ने डीएमएफ न्यास के उद्देश्य, खनिज प्रभावित क्षेत्रों की आवश्यकताओं, भारत सरकार की नवीन दिशा-निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास नियम 2015 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि योजनाओं का निर्माण क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं और सर्वेक्षण के आधार पर किया गया है ताकि विकास कार्यों का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंचे।
गुणवत्ता और समय-सीमा पर रहेगा विशेष ध्यान
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया। निर्णय लिया गया कि सभी स्वीकृत निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि कार्यों की नियमित निगरानी हो सके।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए समय-सीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा की जाएगी। बैठक में यह भी कहा गया कि योजनाओं का उद्देश्य केवल राशि खर्च करना नहीं बल्कि स्थायी और गुणवत्तापूर्ण परिसंपत्तियों का निर्माण करना होना चाहिए।
अवैध उत्खनन पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश
बैठक के दौरान जिले में अवैध उत्खनन के मामलों पर भी गंभीर चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अवैध खनन पर प्रभावी निगरानी रखी जाए तथा ऐसे मामलों में कड़ी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह भी कहा गया कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और उनका वैधानिक उपयोग विकास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बैठक में नगर पालिका परिषद कांकेर के अध्यक्ष अरुण कौशिक, वनमंडलाधिकारी रौनक गोयल, शासी परिषद के सदस्य अर्जुन राम नेताम, केशव मरकाम, सरस्वती देवांगन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने समन्वित प्रयासों से डीएमएफ योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की।




