अहिवारा में पहली बार सीएमओ ने मुख्यालय में निवास कर बढ़ाई प्रशासनिक सक्रियता
प्रवीण सिंह गहलोत की पहल से नगरवासियों को स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान की उम्मीद, ईंधन बचत के जरिए सरकार की पहल में भी सहयोग
अहिवारा। दुर्ग जिले की अहिवारा पंचायत वर्ष 1984 में नगर पंचायत के रूप में अस्तित्व में आई और इसके बाद नगर पंचायत से नगर पालिका परिषद का स्वरूप प्राप्त किया। लेकिन नगर निकाय के गठन से लेकर अब तक मुख्य नगर पालिका अधिकारी के मुख्यालय में निवास करने की व्यवस्था व्यवहारिक रूप से नजर नहीं आई। ऐसे में वर्तमान मुख्य नगर पालिका परिषद अधिकारी प्रवीण सिंह गहलोत द्वारा नगर पालिका के आवास में निवास करने का निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया गया कि नगर पालिका परिसर में सीएमओ एवं इंजीनियर के लिए शासन द्वारा आवास की व्यवस्था की गई है। हालांकि यहां कुछ नगर पालिका कर्मचारी पहले से नन्दनी बी एस पी मे निवास कर रहे हैं। जिसका किराया नगर पालिका अहिवारा भुगतान करता है, जब की नन्दनी टाउनशीप सुविधा युक्त छोड़ कर वार्ड नं 11 शासकीय आवास में रहना उचित समझे। सीएमओ प्रवीण सिंह गहलोत से जब इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि जब शासन ने सीएमओ और इंजीनियर के लिए आवास बनाया है, तो उसका उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भले ही नगर पालिका का आवास अन्य सुविधायुक्त बीएसपी आवास की तुलना में कम सुविधाजनक हो, लेकिन मुख्यालय में रहना प्रशासनिक जिम्मेदारी के लिहाज से अधिक महत्वपूर्ण है।
सीएमओ श्री गहलोत का कहना है कि जब तक अधिकारी मुख्यालय में रहकर क्षेत्र को करीब से नहीं देखेगा, तब तक यह समझ पाना मुश्किल है कि नगर क्षेत्र में कहां किस प्रकार की आवश्यकता है और विकास कार्यों की वास्तविक प्राथमिकता क्या होनी चाहिए। बाहर से आकर कार्यालय में बैठकर केवल कागजी योजनाओं और फाइलों को देखने से विकास की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ सकती।
उनके अनुसार मुख्यालय में रहने से नगर की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही नगरवासी सड़क, नाली, पानी, सफाई, प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य मूलभूत समस्याओं को लेकर सीधे अधिकारी से संपर्क कर सकेंगे और समस्याओं के निराकरण में भी तेजी आने की उम्मीद है।
ईंधन बचत की पहल में भी योगदान।
सीएमओ गहलोत का मुख्यालय में निवास करना सरकार की ईंधन बचत एवं अनावश्यक आवागमन कम करने की पहल के लिहाज से भी सकारात्मक कदम माना जा सकता है। रोजाना बाहर से मुख्यालय आने-जाने के बजाय नगर पालिका के ही आवास में रहने से व्यक्तिगत वाहन के आवागमन में लगने वाले ईंधन की बचत होगी। इस तरह यह पहल न केवल प्रशासनिक दृष्टि से उपयोगी है, बल्कि ईंधन की बचत के माध्यम से राष्ट्रहित में भी एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण योगदान माना जा सकता है।
अहिवारा नगरवासियों के लिए यह पहल इसलिए भी सकारात्मक मानी जा रही है क्योंकि स्थानीय निकाय में अधिकारी की उपलब्धता से आम नागरिक और प्रशासन के बीच दूरी कम होती है। अधिकारी यदि मुख्यालय में उपलब्ध रहे तो आपातकालीन अथवा तत्काल ध्यान देने वाली समस्याओं पर भी समय रहते कार्रवाई की जा सकती है।
वर्तमान सीएमओ प्रवीण सिंह गहलोत की यह पहल केवल आवास में रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मुख्यालय में रहकर नगर की जमीनी जरूरतों को समझने, जनता के बीच प्रशासन की पहुंच बढ़ाने और ईंधन की बचत के जरिए राष्ट्रहित में सहयोग करने की सोच के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह व्यवस्था निरंतर बनी रहती है तो आने वाले समय में अहिवारा नगर पालिका के प्रशासनिक कामकाज और विकास कार्यों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकता है।




