विधायक निधि से लगे वाटर एटीएम की देखरेख पर सवाल, मशीन से आ रही चूहे मरने की दुर्गंध
सात ग्राम पंचायतों में लगभग 25 लाख रुपये की लागत से लगाए गए वाटर एटीएम, मुरमुन्दा स्कूल की मशीन में चूहा मरने के बाद फैली बदबू
अहिवारा। अहिवारा विधानसभा क्षेत्र की सात ग्राम पंचायतों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विधायक निधि से लगभग 25 लाख रुपये की लागत से 250 लीटर प्रति घंटा क्षमता वाले वाटर एटीएम लगाए गए हैं। बताया गया है कि इन वाटर एटीएम के साथ चार वर्षों तक तीनों फिल्टरों सहित रखरखाव की व्यवस्था भी शामिल है। लेकिन मुरमुन्दा ग्राम पंचायत के शासकीय प्राथमिक स्कूल में लगाए गए वाटर एटीएम की देखरेख को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्कूल में लगे वाटर एटीएम के संबंध में स्कूली बच्चों ने शिक्षक को जानकारी दी कि मशीन के अंदर चूहा मरने के कारण तेज दुर्गंध आ रही है। हालांकि पानी में बदबू आने की शिकायत नहीं है। मशीन के आसपास दुर्गंध होने से बच्चों और स्कूल प्रबंधन के लिए परेशानी की स्थिति बनी हुई है। मशीन की सफाई, सैनिटाइजेशन और तकनीकी जांच नहीं होने से भविष्य में स्वच्छता संबंधी समस्या उत्पन्न होने की आशंका भी बनी हुई है।
इस संबंध में पूर्व सरपंच एवं वर्तमान सरपंच के पति परमानंद साहू से जानकारी लेने पर बताया गया कि वाटर एटीएम लगाने के लिए IIT भिलाई से लोग आए थे और मशीन स्थापित करके चले गए। उनके अनुसार मशीन में पानी ठंडा या गर्म होने की सुविधा भी वर्तमान में काम नहीं कर रही है। मशीन में किसी प्रकार की खराबी होने पर संबंधित लोग नियमित रूप से देखरेख करने भी नहीं आते हैं।
चार साल के रखरखाव के बावजूद देखरेख पर सवाल
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब विधायक निधि से लगभग 25 लाख रुपये की राशि सात ग्राम पंचायतों में 250 लीटर प्रति घंटा क्षमता वाले वाटर एटीएम लगाने के साथ चार वर्षों तक रखरखाव के लिए दी गई है, तो फिर मशीनों की नियमित सफाई और तकनीकी देखरेख की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है?
यदि अनुबंध में चार वर्षों तक रखरखाव शामिल है, तो संबंधित एजेंसी द्वारा समय-समय पर मशीनों का निरीक्षण, फिल्टर की जांच, सफाई और आवश्यक मरम्मत की जानी चाहिए। मुरमुन्दा स्कूल की मशीन में चूहा मरने की घटना सामने आने के बाद यह भी जांच का विषय है कि मशीन की नियमित सफाई और निरीक्षण आखिर कितनी बार किया गया।
मशीन पर कंपनी और ट्रेडमार्क की जानकारी भी स्पष्ट नहीं
वाटर एटीएम की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर एक अन्य सवाल भी सामने आ रहा है। मशीन पर प्रथम दृष्टया निर्माता कंपनी, ब्रांड अथवा ट्रेडमार्क की स्पष्ट जानकारी दिखाई नहीं देने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि सातों ग्राम पंचायतों में लगाए गए वाटर एटीएम किस कंपनी के हैं, उनका मॉडल और तकनीकी क्षमता क्या है तथा स्थापना एवं चार वर्षों के रखरखाव की जिम्मेदारी किस संस्था या एजेंसी को दी गई है।
सरकार लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। ऐसे में विधायक निधि से लगाए गए वाटर एटीएम का सही तरीके से संचालन और नियमित रखरखाव होना जरूरी है। यह राशि आम जनता के टैक्स से प्राप्त सार्वजनिक धन है, इसलिए इसकी उपयोगिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग एवं जिम्मेदार एजेंसी की जवाबदेही है।
अब देखना होगा कि मुरमुन्दा स्कूल में लगे वाटर एटीएम की सफाई और तकनीकी जांच कब होती है तथा सातों ग्राम पंचायतों में लगाए गए सभी वाटर एटीएम की स्थिति की विभागीय स्तर पर जांच कराई जाती है या नहीं।




