अहिवारा

12 साल पुराने पट्टा मामले में फिर उठे सवाल, कलेक्टर भू-अभिलेख शाखा की जांच रिपोर्ट में कई अनियमितताओं का उल्लेख

दुर्ग। ग्राम मुरमुंदा से जुड़े बहुचर्चित शासकीय भूमि पट्टा प्रकरण में कलेक्टर कार्यालय (भू-अभिलेख शाखा) दुर्ग द्वारा तैयार जांच प्रतिवेदन ने एक बार फिर मामले को चर्चा में ला दिया है। न्यायालयीन प्रकरण (वर्ष 2015-16) के परीक्षण के दौरान प्रस्तुत रिपोर्ट में वर्ष 1998 से 2002 के बीच जारी किए गए कुछ आवासीय पट्टों की वैधता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल दर्ज किए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता राजेश्वर गायकवाड़ ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन ग्राम पंचायत मुरमुंदा के सरपंच द्वारा अपने रिश्तेदारों के नाम पर शासकीय तालाब एवं अन्य भूमि पर नियमों के विपरीत पट्टे जारी किए गए। इस संबंध में पहले अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), अपर कलेक्टर तथा बाद में संभागायुक्त स्तर तक प्रकरण की सुनवाई हुई।

जांच प्रतिवेदन में उल्लेख है कि अपर कलेक्टर दुर्ग ने वर्ष 2012 में पट्टों की वैधता की जांच के निर्देश दिए थे, जिसके बाद नायब तहसीलदार द्वारा स्थल निरीक्षण एवं दस्तावेजों की जांच की गई।

रिपोर्ट में तीन प्रमुख पट्टों का विशेष उल्लेख किया गया है—

खसरा नंबर 921/4 (0.04 हेक्टेयर) के संबंध में जांच में पाया गया कि पट्टा वर्ष 1998 में जारी हुआ था, जबकि आवासीय निर्माण वर्ष 2012 के बाद कराया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पट्टे की शर्तों के अनुसार एक वर्ष के भीतर मकान निर्माण नहीं किया गया, जिससे पट्टा निरस्तीकरण की अनुशंसा की गई।

खसरा नंबर 901/4 (0.05 हेक्टेयर) के मामले में भी जांच अधिकारी ने उल्लेख किया कि निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य नहीं हुआ और वर्तमान में पक्का मकान बाद के वर्षों में निर्मित पाया गया। इस आधार पर भी पट्टा निरस्त किए जाने की अनुशंसा की गई।

खसरा नंबर 910/4 (0.04 हेक्टेयर) के संबंध में भी रिपोर्ट में कहा गया कि पट्टा मिलने के एक वर्ष के भीतर निर्माण नहीं किया गया तथा वर्तमान निर्माण काफी बाद में हुआ, जिसके कारण इसे भी नियमों के विपरीत माना गया।

भू-अभिलेख शाखा की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि यदि पट्टाधारियों ने निर्धारित समय-सीमा में निर्माण नहीं किया था तो संबंधित पट्टों के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती थी। साथ ही, जांच में यह भी दर्ज है कि कुछ प्रकरणों में तालाब भूमि के सीमांकन और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण की आवश्यकता महसूस की गई। पूर्व सरपंच बोधन महिलांग के परिवार द्वारा वर्तमान में बने मकान में निवास करने की कोशिश कर रहे हैं जिसकी शिकायत श्री गायकवाड़ ने थाना प्रभारी नंदिनी से की हैं।

यह मामला लंबे समय से विभिन्न न्यायालयों एवं राजस्व अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय इस जांच प्रतिवेदन को कितना महत्व देता है तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

यह समाचार उपलब्ध न्यायालयीन एवं राजस्व अभिलेखों पर आधारित है। अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाना शेष है।)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker